किस्मत में लिखा था तेरा नाम | Love and Destiny Story

 

Love and Destiny Story

आदित्य एक साधारण लड़का था। वह अपने परिवार के साथ लखनऊ में रहता था और एक निजी कंपनी में नौकरी करता था। उसकी जिंदगी काम और जिम्मेदारियों के बीच गुजर रही थी। प्यार के बारे में उसने कभी गंभीरता से नहीं सोचा था।

एक दिन ऑफिस जाते समय उसकी मुलाकात एक लड़की से हुई। लड़की का नाम सिया था। सिया की मुस्कान में कुछ ऐसा था जिसने आदित्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

कुछ दिनों तक दोनों बस स्टॉप पर एक-दूसरे को देखते रहे। धीरे-धीरे मुस्कुराहटों का सिलसिला शुरू हो गया। फिर एक दिन बारिश ने दोनों को बात करने का मौका दे दिया।

आदित्य ने अपना छाता सिया की ओर बढ़ाते हुए कहा, "बारिश काफी तेज है, आप चाहें तो मेरे साथ आ सकती हैं।"

सिया मुस्कुराकर बोली, "धन्यवाद। वैसे मेरा नाम सिया है।"

यहीं से उनकी दोस्ती की शुरुआत हुई।

अब दोनों रोज मिलने लगे। कभी चाय पर बातें होतीं, कभी पार्क में टहलते हुए। दोनों को एहसास ही नहीं हुआ कि दोस्ती कब प्यार में बदल गई।

एक शाम गोमती नदी के किनारे बैठे हुए आदित्य ने कहा, "सिया, मुझे लगता है कि मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं।"

सिया मुस्कुराई और बोली, "मुझे लगता है नहीं, मुझे यकीन है कि मैं भी तुमसे प्यार करती हूं।"

उस दिन दोनों ने साथ रहने के सपने देखे।

लेकिन जिंदगी हमेशा आसान नहीं होती।

कुछ समय बाद सिया के पिता का ट्रांसफर दूसरे शहर में हो गया। सिया को अपने परिवार के साथ जाना पड़ा। जाते समय उसने आदित्य से कहा, "अगर हमारा प्यार सच्चा है तो किस्मत हमें फिर मिलाएगी।"

आदित्य ने जवाब दिया, "मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा।"

समय बीतता गया। शुरुआत में दोनों संपर्क में रहे, लेकिन हालात ऐसे बने कि उनका संपर्क टूट गया। फोन नंबर बदल गए और दोनों एक-दूसरे से बिछड़ गए।

पांच साल गुजर गए।

एक दिन आदित्य अपने दोस्त की शादी में गया। वहां अचानक उसकी नजर एक परिचित चेहरे पर पड़ी।

वह सिया थी।

दोनों कुछ पल तक एक-दूसरे को देखते रह गए। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि इतने वर्षों बाद वे फिर आमने-सामने खड़े हैं।

जब दोनों ने बात की तो पता चला कि उन्होंने कभी एक-दूसरे को भूलने की कोशिश ही नहीं की थी।

सिया ने कहा, "मैंने हमेशा सोचा था कि एक दिन हम जरूर मिलेंगे।"

आदित्य मुस्कुराया और बोला, "क्योंकि हमारी किस्मत में यही लिखा था।"

दोनों परिवारों की मुलाकात हुई और जल्द ही उनकी सगाई तय हो गई।

शादी के दिन आदित्य ने सिया से कहा, "मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी थी।"

सिया ने उसका हाथ पकड़कर कहा, "और मैंने कभी विश्वास नहीं खोया था।"

दोनों की आंखों में खुशी के आंसू थे।

उस दिन उन्हें एहसास हुआ कि सच्चे प्यार को पाने के लिए कभी-कभी लंबा इंतजार करना पड़ता है। लेकिन जब किस्मत में किसी का नाम लिखा हो, तो दुनिया की कोई ताकत उसे आपसे दूर नहीं रख सकती।

आखिरकार, आदित्य की किस्मत में सिया का नाम लिखा था और सिया की किस्मत में आदित्य का।

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