विजयनगर के राजदरबार में एक दिन राजा कृष्णदेव राय ने अपने मंत्रियों को एक कठिन पहेली सुलझाने का आदेश दिया। राजा हमेशा नए-नए सवालों से अपने दरबारियों की बुद्धिमत्ता की परीक्षा लेते थे, और इस बार भी उन्होंने एक ऐसा सवाल पूछा, जिसने सभी को सोच में डाल दिया।
राजा की पहेली
राजा ने दरबार में ऐलान किया, "जो कोई भी मेरे इस प्रश्न का सही उत्तर देगा, उसे मैं सौ स्वर्ण मुद्राएँ इनाम में दूँगा।"
सभी मंत्री उत्सुक हो गए और राजा के प्रश्न की प्रतीक्षा करने लगे। राजा मुस्कुराए और बोले,
"इस दुनिया में सबसे कीमती चीज़ क्या है?"
दरबारियों ने सोचना शुरू किया। किसी ने कहा—"सोना और हीरे," तो किसी ने कहा—"शक्तिशाली सेना," और किसी ने कहा—"राजा का सिंहासन।"
लेकिन राजा ने सभी के उत्तरों को अस्वीकार कर दिया। फिर उन्होंने तेनाली राम की ओर देखा और कहा, "तेनाली, तुम क्या सोचते हो?"
तेनाली का चतुराई भरा उत्तर
तेनाली राम मुस्कुराए और बोले, "महाराज, इस दुनिया में सबसे कीमती चीज़ समय है।"
राजा और दरबारी चौंक गए। राजा ने पूछा, "समय? यह कैसे?"
तेनाली ने समझाया, "महाराज, धन-सम्पत्ति, सिंहासन, सेना, सब कुछ फिर से पाया जा सकता है, लेकिन जो समय एक बार बीत जाता है, वह कभी वापस नहीं आता। समय से बढ़कर कीमती कुछ नहीं होता। जो व्यक्ति अपने समय का सही उपयोग करता है, वही असली विजेता होता है।"
राजा की प्रसन्नता
राजा कृष्णदेव राय टेनाली के उत्तर से बहुत प्रसन्न हुए और बोले, "तेनाली, तुमने फिर से साबित कर दिया कि तुम सबसे बुद्धिमान व्यक्ति हो! सचमुच, समय ही सबसे मूल्यवान है।"
राजा ने तेनाली को सौ स्वर्ण मुद्राएँ इनाम में दीं और दरबार में सभी को यह सीख दी कि समय का सदुपयोग ही सफलता की कुंजी है।
कहानी से सीख
यह कहानी हमें सिखाती है कि धन, संपत्ति और शक्ति से भी अधिक मूल्यवान समय होता है। यदि हम अपने समय को व्यर्थ न करके सही दिशा में लगाएँ, तो हम जीवन में महान ऊँचाइयाँ छू सकते हैं।
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