विजयनगर के राजदरबार में तेनाली रामकृष्ण की चतुराई के किस्से मशहूर थे। वह अपनी बुद्धिमानी से न सिर्फ मुश्किल समस्याओं का हल निकालते थे, बल्कि धोखेबाजों को उनकी ही चाल में फंसा कर सबक भी सिखाते थे।
धोखेबाज व्यापारी की चाल
एक दिन, एक दूर देश से आया व्यापारी राजा कृष्णदेव राय के दरबार में पहुँचा। वह एक विशेष प्रकार का तेल बेच रहा था, जो उसके अनुसार बहुत ही अनोखा था। व्यापारी ने दावा किया, "यह तेल इंसान की याददाश्त को कई गुना बढ़ा सकता है। इसे सिर पर लगाने से कोई भी व्यक्ति कभी कुछ नहीं भूलेगा!"
राजा को यह बात सुनकर आश्चर्य हुआ। उन्होंने सोचा कि यदि यह सच है, तो यह तेल राज्य के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। लेकिन तेनाली राम को व्यापारी पर शक हुआ। उन्होंने राजा से कहा, "महाराज, यह व्यापारी अपनी बात को सिद्ध करने के लिए तैयार होगा, यदि यह सचमुच इतना चमत्कारी तेल है।"
राजा ने व्यापारी से पूछा कि वह अपनी बात को कैसे सिद्ध करेगा। व्यापारी ने कहा, "मुझे 500 स्वर्ण मुद्राएँ दें, और मैं इसे आपके किसी भी मंत्री पर आज़माकर दिखा सकता हूँ।"
तेनाली की चालाकी
तेनाली को समझ आ गया कि व्यापारी झूठ बोल रहा है। उसने राजा से कहा, "महाराज, यह तेल सच में काम करता है या नहीं, इसे परखने का एक आसान तरीका है। क्यों न हम इसे खुद व्यापारी पर ही आज़मा लें?"
राजा को यह सुझाव पसंद आया। उन्होंने व्यापारी से कहा, "अगर तुम्हारा तेल इतना प्रभावशाली है, तो पहले तुम इसे अपने सिर पर लगाकर हमें दिखाओ कि तुम्हारी याददाश्त कितनी तेज़ हो जाती है।"
व्यापारी घबरा गया और कहने लगा, "महाराज, यह तेल कुछ समय बाद ही असर दिखाता है। मैं इसे अभी नहीं लगा सकता!"
तेनाली मुस्कुराए और बोले, "अगर यह तुरंत असर नहीं करता, तो तुमने पहले ही झूठ क्यों बोला कि यह चमत्कारी है?"
राजा को व्यापारी की चाल समझ आ गई। उन्होंने सिपाहियों को आदेश दिया कि उस व्यापारी को तुरंत राज्य से बाहर निकाल दिया जाए और लोगों को उसकी ठगी से बचने की चेतावनी दी जाए।
सबक और शिक्षा
इस तरह तेनाली राम ने अपनी बुद्धिमत्ता से राजा और पूरे दरबार को एक बड़े धोखे से बचा लिया। राजा ने तेनाली की चतुराई की प्रशंसा की और कहा, "तेनाली, तुम्हारी चतुराई हमेशा राज्य की रक्षा करती है!"
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि किसी भी चीज़ पर आँख मूँदकर विश्वास नहीं करना चाहिए, बल्कि तर्क और बुद्धिमत्ता से हर बात की सच्चाई परखनी चाहिए।

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