दिल्ली की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर हर कोई अपनी जिंदगी की दौड़ में भाग रहा था। उन्हीं लोगों के बीच एक लड़का था — आरव। साधारण सा चेहरा, शांत स्वभाव और आँखों में बहुत सारे सपने। आरव एक छोटी कंपनी में ग्राफिक डिजाइनर की नौकरी करता था। उसकी जिंदगी बस ऑफिस, कमरा और मोबाइल तक सीमित थी।
आरव का मानना था कि जिंदगी में खुशियाँ सिर्फ फिल्मों में होती हैं। असल जिंदगी में लोग बस काम करते हैं और थककर सो जाते हैं। लेकिन उसकी सोच तब बदल गई जब उसकी जिंदगी में मीरा आई।
मीरा उसी कंपनी में नई जॉइन हुई थी। पहली बार जब आरव ने उसे देखा, वह ऑफिस की खिड़की के पास खड़ी होकर मुस्कुरा रही थी। उसकी मुस्कान इतनी प्यारी थी कि जैसे किसी ने थके हुए दिल को सुकून दे दिया हो।
उस दिन पहली बार आरव के चेहरे पर भी हल्की सी मुस्कान आई।
धीरे-धीरे दोनों की बातें शुरू होने लगीं। पहले सिर्फ “हैलो” और “कैसे हो” तक सीमित बातें अब चाय और लंच तक पहुँच गई थीं। मीरा बहुत बातूनी थी, जबकि आरव कम बोलता था। लेकिन मीरा उसकी खामोशी को भी समझने लगी थी।
एक दिन ऑफिस की कैंटीन में मीरा ने पूछा,
“तुम हमेशा इतने शांत क्यों रहते हो?”
आरव हल्का सा मुस्कुराया और बोला,
“क्योंकि ज्यादा उम्मीदें रखने वालों को ज्यादा दुख मिलता है।”
मीरा ने उसकी तरफ देखा और बोली,
“लेकिन उम्मीदों के बिना जिंदगी भी तो अधूरी होती है।”
उसकी बात सुनकर आरव कुछ देर चुप रहा। शायद पहली बार किसी ने उसके दिल की दीवार पर दस्तक दी थी।
समय बीतता गया। अब दोनों रोज साथ ऑफिस जाते, साथ चाय पीते और देर तक बातें करते। मीरा की आदत थी कि वह हर छोटी बात पर मुस्कुरा देती थी। और आरव को उसकी वही मुस्कान सबसे ज्यादा पसंद थी।
एक दिन बारिश हो रही थी। ऑफिस खत्म होने के बाद दोनों बस स्टॉप पर खड़े थे। तेज बारिश और ठंडी हवा के बीच मीरा बच्चों की तरह बारिश में भीग रही थी।
आरव उसे देखकर बोला,
“तुम पागल हो जाओगी।”
मीरा हँसते हुए बोली,
“अगर जिंदगी में थोड़ी पागलपन ना हो तो मजा कैसे आएगा?”
फिर उसने अचानक पूछा,
“तुम्हें मेरी सबसे अच्छी बात क्या लगती है?”
आरव कुछ सेकंड उसे देखता रहा और धीरे से बोला,
“तेरी मुस्कान… क्योंकि उसमें मेरी पूरी दुनिया बसती है।”
मीरा चुप हो गई। उसके चेहरे पर हल्की शर्म और आँखों में चमक थी। उस दिन दोनों पहली बार एक-दूसरे के इतने करीब महसूस कर रहे थे।
उस रात आरव बहुत खुश था। उसे लगने लगा था कि जिंदगी सच में खूबसूरत हो सकती है।
लेकिन हर कहानी इतनी आसान नहीं होती।
कुछ महीनों बाद मीरा अचानक ऑफिस आना बंद हो गई। उसका फोन भी बंद आने लगा। आरव परेशान हो गया। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह हर दिन ऑफिस में उसका इंतजार करता।
एक हफ्ते बाद मीरा का मैसेज आया —
“मुझे तुमसे मिलना है।”
आरव तुरंत मिलने पहुँच गया। मीरा पार्क की एक बेंच पर बैठी थी। उसके चेहरे की मुस्कान गायब थी।
आरव घबराकर बोला,
“क्या हुआ? तुम ठीक हो ना?”
मीरा की आँखें भर आईं। उसने धीमी आवाज में कहा,
“मुझे कैंसर है।”
ये सुनते ही आरव के पैरों तले जमीन खिसक गई।
मीरा बोली,
“डॉक्टर ने कहा है इलाज लंबा चलेगा। शायद मैं पहले जैसी ना रह पाऊँ।”
आरव की आँखों में आँसू आ गए। उसने मीरा का हाथ पकड़कर कहा,
“मुझे तुम्हारा साथ चाहिए… तुम्हारी मुस्कान चाहिए। बाकी कुछ मायने नहीं रखता।”
मीरा रोते हुए मुस्कुराई।
“तुम इतने अच्छे क्यों हो?”
आरव बोला,
“क्योंकि तुमने मुझे जीना सिखाया है।”
उस दिन के बाद आरव हर पल मीरा के साथ रहने लगा। अस्पताल जाना, दवाइयाँ लाना, घंटों उसके पास बैठना — अब यही उसकी जिंदगी थी।
इलाज के दौरान मीरा के बाल झड़ने लगे। वह खुद को आईने में देखकर रो पड़ती थी।
एक दिन उसने आरव से कहा,
“अब मैं पहले जैसी सुंदर नहीं रही।”
आरव मुस्कुराया और बोला,
“मुझे तुमसे प्यार तुम्हारे चेहरे से नहीं हुआ था… तुम्हारी मुस्कान से हुआ था।”
मीरा की आँखों से आँसू बहने लगे।
धीरे-धीरे इलाज का असर दिखने लगा। मीरा कमजोर जरूर हो गई थी, लेकिन उसकी हिम्मत पहले से ज्यादा मजबूत हो चुकी थी। उसकी मुस्कान फिर लौटने लगी थी।
एक शाम अस्पताल की छत पर दोनों बैठे थे। आसमान में ढलता सूरज बहुत खूबसूरत लग रहा था।
मीरा बोली,
“अगर मैं ठीक हो गई ना… तो हम कहीं दूर घूमने जाएँगे।”
आरव हँसते हुए बोला,
“जहाँ तुम कहोगी।”
मीरा ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“तुम जानते हो? जब तुम मेरे साथ होते हो ना, तब डर नहीं लगता।”
आरव ने कहा,
“और जब तुम मुस्कुराती हो, तब मुझे लगता है मेरी दुनिया अभी भी खूबसूरत है।”
कुछ महीनों बाद आखिरकार डॉक्टर ने खुशखबरी दी कि मीरा अब खतरे से बाहर है।
उस दिन मीरा खुशी से रो पड़ी। आरव ने उसे गले लगा लिया।
मीरा बोली,
“तुमने मेरा साथ ना छोड़ा… जबकि मैं खुद टूट चुकी थी।”
आरव मुस्कुराया और बोला,
“क्योंकि तेरी मुस्कान मेरी दुनिया है… और मैं अपनी दुनिया को कभी टूटने नहीं दे सकता।”
दो साल बाद दोनों की शादी हो गई। उनकी जिंदगी अब पहले से ज्यादा खूबसूरत थी। लड़ाइयाँ भी होती थीं, छोटी-छोटी नाराजगियाँ भी, लेकिन हर बार मीरा की मुस्कान सब ठीक कर देती थी।
एक दिन उनकी छोटी बेटी ने पूछा,
“पापा, आपको मम्मी में सबसे अच्छा क्या लगता है?”
आरव मुस्कुराया, मीरा की तरफ देखा और बोला,
“तुम्हारी मम्मी की मुस्कान… क्योंकि उसी में मेरी पूरी दुनिया बसती है।”
मीरा हँस पड़ी। और वही मुस्कान आज भी आरव की जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी थी।



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