शाम का समय था। हल्की बारिश हो रही थी और सड़क किनारे बने छोटे से कैफे में लोग चाय और कॉफी का मजा ले रहे थे। उसी कैफे के एक कोने में बैठा था आदित्य। हाथ में कॉफी का कप था, लेकिन उसका ध्यान कहीं और था।
उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी। जैसे जिंदगी से उसका भरोसा उठ चुका हो।
तीन साल पहले उसकी शादी टूट गई थी। जिस लड़की से उसने सबसे ज्यादा प्यार किया था, वही उसे छोड़कर चली गई। उस दिन के बाद आदित्य ने खुद को काम में इतना व्यस्त कर लिया कि उसे प्यार नाम से भी डर लगने लगा था।
उसके दोस्त अक्सर कहते,
“यार, जिंदगी खत्म नहीं हुई है।”
लेकिन आदित्य सिर्फ मुस्कुरा देता।
उसका मानना था कि सच्ची मोहब्बत जिंदगी में सिर्फ एक बार होती है।
उस दिन भी वह अकेला बैठा बारिश देख रहा था, तभी एक लड़की जल्दी-जल्दी भागते हुए कैफे में आई। उसके हाथ में किताबें थीं और बारिश की वजह से उसके बाल भीग चुके थे।
वह सीधे आदित्य की टेबल के पास आई और बोली,
“सॉरी… क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ? बाकी सारी टेबल फुल हैं।”
आदित्य ने हल्का सा सिर हिलाकर “हाँ” कहा।
लड़की मुस्कुराकर बैठ गई। उसने वेटर से चाय मंगाई और अपने बाल ठीक करने लगी।
कुछ देर तक दोनों चुप रहे।
फिर अचानक लड़की बोली,
“बारिश ना… हमेशा पुरानी यादें ले आती है।”
आदित्य पहली बार उसकी तरफ ध्यान से देखने लगा।
“आपको भी?” उसने धीरे से पूछा।
लड़की मुस्कुराई,
“हाँ… कुछ अच्छी, कुछ बुरी।”
उसका नाम नैना था।
उस दिन बस इतनी ही बात हुई। लेकिन जाते-जाते नैना मुस्कुराकर बोली,
“उम्मीद है फिर मुलाकात होगी।”
आदित्य ने सिर्फ हल्की सी मुस्कान दी।
लेकिन शायद किस्मत को कुछ और मंजूर था।
अगले हफ्ते वही लड़की उसे फिर उसी कैफे में मिली। इस बार नैना ने आते ही कहा,
“लगता है ये टेबल हमारी फिक्स हो चुकी है।”
आदित्य हँस पड़ा। शायद कई महीनों बाद वह दिल से हँसा था।
धीरे-धीरे दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगीं। कभी चाय, कभी लंबी बातें, कभी बारिश में भीगना… दोनों एक-दूसरे की आदत बनते जा रहे थे।
नैना बहुत खुशमिजाज लड़की थी। उसे छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूँढना आता था।
एक दिन उसने आदित्य से पूछा,
“तुम हमेशा इतने गंभीर क्यों रहते हो?”
आदित्य कुछ पल चुप रहा। फिर बोला,
“क्योंकि जिन लोगों पर सबसे ज्यादा भरोसा किया… उन्होंने ही सबसे ज्यादा दर्द दिया।”
नैना ने उसकी तरफ देखा और धीमे से कहा,
“हर इंसान एक जैसा नहीं होता आदित्य।”
उसकी आवाज में अपनापन था।
उस दिन पहली बार आदित्य ने अपने दिल की बातें किसी को बताईं। उसने अपने टूटे रिश्ते के बारे में सब कुछ नैना को बता दिया।
सब सुनने के बाद नैना बोली,
“किसी एक इंसान के जाने से जिंदगी खत्म नहीं होती। कभी-कभी भगवान किसी गलत इंसान को इसलिए दूर करता है ताकि सही इंसान आपकी जिंदगी में आ सके।”
आदित्य उसे बस देखता रह गया।
धीरे-धीरे उसकी जिंदगी बदलने लगी। अब सुबह उठते ही वह नैना के मैसेज का इंतजार करता। ऑफिस के बाद सीधे कैफे पहुँच जाता।
उसे खुद समझ नहीं आ रहा था कि वह फिर से खुश कैसे रहने लगा था।
एक दिन दोनों नदी किनारे बैठे थे। ठंडी हवा चल रही थी।
नैना अचानक बोली,
“तुम जानते हो? जब इंसान टूट जाता है ना… तब उसे प्यार से ज्यादा भरोसे की जरूरत होती है।”
आदित्य ने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में सच्चाई थी।
वह बोला,
“और अगर भरोसा फिर टूट जाए तो?”
नैना मुस्कुराई,
“तो समझ लेना कि वो प्यार नहीं था।”
उसकी बातें सीधे दिल में उतर जाती थीं।
समय बीतता गया। आदित्य अब पहले वाला उदास इंसान नहीं रहा था। उसके चेहरे पर मुस्कान लौट आई थी।
उसके दोस्त भी हैरान थे।
एक दिन उसके दोस्त रोहन ने मजाक में पूछा,
“कहीं फिर से प्यार-व्यार तो नहीं हो गया?”
आदित्य मुस्कुराया, लेकिन कुछ बोला नहीं।
असल में उसे खुद भी डर लग रहा था। वह दोबारा दिल टूटने का दर्द नहीं सहना चाहता था।
लेकिन दिल कब किसी की सुनता है।
एक शाम नैना ने उसे अपने घर बुलाया। छोटा सा सुंदर घर था। दीवारों पर पेंटिंग्स लगी थीं और बालकनी में ढेर सारे पौधे।
नैना चाय बनाते हुए बोली,
“मुझे ना… घर में हरियाली बहुत पसंद है। लगता है जिंदगी जिंदा है।”
आदित्य उसे देखकर मुस्कुरा रहा था।
उसी समय उसकी नजर टेबल पर रखी एक फोटो पर गई। फोटो में नैना किसी लड़के के साथ थी।
आदित्य थोड़ा चुप हो गया।
नैना समझ गई।
उसने धीरे से कहा,
“ये मेरे पति थे।”
आदित्य हैरान रह गया।
नैना की आँखें नम हो गईं।
“दो साल पहले एक एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई।”
कुछ पल के लिए कमरे में खामोशी छा गई।
नैना बोली,
“उस दिन लगा था जिंदगी खत्म हो गई। लेकिन फिर समझ आया कि किसी के जाने से जिंदगी रुकती नहीं है।”
आदित्य पहली बार समझ पाया कि मुस्कुराने वाले लोग हमेशा खुश नहीं होते।
उस रात घर लौटते समय वह बस यही सोचता रहा कि दर्द सिर्फ उसके हिस्से में नहीं था।
कुछ दिनों बाद आदित्य ने महसूस किया कि वह नैना से प्यार करने लगा है।
लेकिन उसे डर था।
अगर नैना ने मना कर दिया तो?
बहुत सोचने के बाद उसने एक दिन नैना को उसी कैफे में बुलाया जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी।
बारिश फिर हो रही थी।
आदित्य ने काँपती आवाज में कहा,
“मैंने सोचा था कि मैं कभी किसी से दोबारा प्यार नहीं कर पाऊँगा… लेकिन तुमने मेरी सोच बदल दी।”
नैना चुपचाप उसे सुन रही थी।
आदित्य बोला,
“मोहब्बत फिर से हो गई है… तुमसे।”
कुछ सेकंड तक खामोशी रही।
फिर नैना की आँखों से आँसू निकल आए।
वह मुस्कुराकर बोली,
“मुझे भी।”
उस पल ऐसा लगा जैसे दोनों के टूटे हुए दिलों को फिर से जीने की वजह मिल गई हो।
कुछ महीनों बाद दोनों ने शादी कर ली।
उनकी जिंदगी परफेक्ट नहीं थी। कभी छोटी-छोटी बहसें होतीं, कभी नाराजगी भी। लेकिन अब दोनों जानते थे कि सच्चा प्यार वही होता है जहाँ इंसान टूटने के बाद भी एक-दूसरे का हाथ नहीं छोड़ते।
एक रात बालकनी में बैठकर बारिश देखते हुए नैना ने पूछा,
“अगर मैं उस दिन कैफे में ना आती तो?”
आदित्य मुस्कुराया और बोला,
“तो शायद मुझे कभी पता ही नहीं चलता कि मोहब्बत जिंदगी में दोबारा भी हो सकती है।”
नैना हँस पड़ी।
और उस हँसी में आदित्य को फिर से जीने की वजह मिल गई।
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