बारिश की हल्की बूंदें खिड़की पर गिर रही थीं। आरव अपने कमरे में अकेला बैठा पुरानी तस्वीरें देख रहा था। उन तस्वीरों में एक चेहरा ऐसा था जिसे वह लाख कोशिशों के बाद भी भूल नहीं पाया था — सिया।
सिया और आरव की मुलाकात कॉलेज में हुई थी। दोनों एक ही क्लास में थे। शुरुआत में सिर्फ नोट्स शेयर होते थे, फिर बातें होने लगीं। धीरे-धीरे दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि दोनों एक-दूसरे के बिना दिन की कल्पना भी नहीं कर सकते थे।
सिया बहुत हंसमुख लड़की थी। उसकी मुस्कान देखकर आरव की सारी परेशानियां खत्म हो जाती थीं। कॉलेज खत्म होने के बाद दोनों घंटों फोन पर बातें करते थे। हर किसी को लगता था कि दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने हैं। लेकिन शायद किस्मत को कुछ और मंजूर था।
एक दिन सिया अचानक बहुत परेशान दिखी। आरव ने पूछा,
“क्या हुआ? तुम इतनी चुप क्यों हो?”
सिया ने धीमी आवाज में कहा,
“पापा ने मेरी शादी तय कर दी है।”
यह सुनकर आरव जैसे अंदर से टूट गया। उसे लगा जैसे किसी ने उसकी सारी खुशियां छीन ली हों। कुछ देर तक वह कुछ बोल ही नहीं पाया।
“तुमने मना नहीं किया?” आरव ने कांपती आवाज में पूछा।
सिया की आंखों में आंसू आ गए।
“मैं चाहकर भी नहीं कर सकती। घर वालों की खुशी मेरे लिए सबसे जरूरी है।”
उस रात दोनों बहुत रोए। पहली बार उन्हें एहसास हुआ कि मोहब्बत सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं होती, कभी-कभी छोड़ देना भी प्यार होता है।
शादी से पहले सिया ने आरव को आखिरी बार मिलने बुलाया। दोनों उसी पुराने पार्क में मिले जहां कभी घंटों बैठकर बातें किया करते थे। हवा में अजीब सी खामोशी थी।
सिया ने मुस्कुराने की कोशिश करते हुए कहा,
“अगर अगले जन्म जैसा कुछ होता है ना, तो मैं सिर्फ तुम्हारी बनना चाहती हूं।”
आरव की आंखें भर आईं। उसने बस इतना कहा,
“इस जन्म में भी तुम सिर्फ मेरी ही रहोगी… दिल में।”
सिया चली गई। उसके बाद ना कोई कॉल आया, ना कोई मैसेज। समय बीतता गया। आरव ने नौकरी शुरू कर दी, जिंदगी आगे बढ़ती रही, लेकिन दिल के किसी कोने में सिया हमेशा जिंदा रही।
कई साल बाद एक दिन आरव को सोशल मीडिया पर सिया की तस्वीर दिखी। उसके साथ उसका छोटा सा बेटा था। सिया मुस्कुरा रही थी, लेकिन उसकी आंखों में वही अधूरापन था जिसे आरव आज भी महसूस करता था।
आरव ने तस्वीर देखकर हल्की सी मुस्कान दी और फोन बंद कर दिया। वह समझ चुका था कि कुछ मोहब्बतें मुकम्मल नहीं होतीं, फिर भी जिंदगी भर दिल में बस जाती हैं।
बारिश अब भी हो रही थी। आरव खिड़की के पास खड़ा आसमान को देख रहा था। उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान थी और आंखों में नमी।
क्योंकि कुछ प्यार कभी खत्म नहीं होते…
वे बस अधूरे रह जाते हैं।
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