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राहुल अपने कमरे की पुरानी अलमारी साफ कर रहा था। धूल से भरे पुराने कागज़, कॉलेज की किताबें और कुछ तस्वीरें निकालते-निकालते उसकी नजर एक छोटे से गुलाबी लिफाफे पर पड़ी। लिफाफे पर साफ अक्षरों में लिखा था — “राहुल के लिए”।
उसका दिल अचानक तेज़ धड़कने लगा। यह खत नेहा का था… उसकी पहली मोहब्बत का आखिरी खत।
राहुल कुर्सी पर बैठ गया और धीरे-धीरे लिफाफा खोला। जैसे ही उसने खत पढ़ना शुरू किया, पुरानी यादें आँखों के सामने घूमने लगीं।
नेहा और राहुल कॉलेज में साथ पढ़ते थे। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई थी। कैंटीन की चाय, लाइब्रेरी में चोरी-छुपे बातें करना और बारिश में भीगते हुए घर जाना — सब कुछ किसी फिल्म जैसा लगता था।
नेहा बहुत शांत स्वभाव की लड़की थी, जबकि राहुल थोड़ा मजाकिया और बेफिक्र। दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे, लेकिन शायद इसी वजह से एक-दूसरे को समझते थे।
कॉलेज खत्म होने के बाद राहुल नौकरी के लिए दिल्ली चला गया। शुरू-शुरू में दोनों रोज बात करते थे, लेकिन धीरे-धीरे जिम्मेदारियाँ बढ़ती गईं। फोन कम होने लगे और फिर एक दिन नेहा ने अचानक बात करना बंद कर दिया।
राहुल ने कई बार कॉल किए, मैसेज किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। कुछ महीनों बाद उसे पता चला कि नेहा की शादी तय हो गई है।
उस दिन राहुल बहुत टूटा था। उसे लगा था कि नेहा ने उसे धोखा दिया है। गुस्से में उसने भी कभी उससे संपर्क करने की कोशिश नहीं की।
लेकिन आज इतने सालों बाद उसके हाथ में वही आखिरी खत था।
राहुल ने कांपते हाथों से खत पढ़ना शुरू किया—
"प्रिय राहुल,
जब तुम यह खत पढ़ोगे, तब शायद मैं बहुत दूर जा चुकी होऊँगी। मुझे माफ कर देना कि मैं बिना कुछ बताए जा रही हूँ। पापा की तबीयत बहुत खराब है और उनकी आखिरी इच्छा है कि मैं उनकी पसंद के लड़के से शादी कर लूं। मैं उन्हें मना नहीं कर पाई।
मैं जानती हूँ तुम मुझसे नाराज़ होगे, लेकिन यकीन मानो, मैंने तुमसे सच्चा प्यार किया था। तुम मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा रहोगे।
एक बात हमेशा याद रखना — पहली मोहब्बत कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती। वह दिल के किसी कोने में हमेशा जिंदा रहती है।
खुश रहना।
— नेहा”
खत पढ़ते-पढ़ते राहुल की आँखें नम हो गईं। इतने सालों तक वह नेहा को गलत समझता रहा।
उसने खिड़की से बाहर देखा। हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी। वही बारिश, जो कभी दोनों को बहुत पसंद थी।
राहुल मुस्कुराया और धीरे से खत को सीने से लगा लिया। अब उसे कोई शिकायत नहीं थी। कुछ प्यार अधूरे होकर भी जिंदगीभर साथ रहते हैं।
उस रात राहुल ने पहली बार नेहा को याद करके आँसू नहीं बहाए, बल्कि दिल से उसे खुश रहने की दुआ दी।



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