![]() |
| https://hindikahaniyokasangreh.blogspot.com/ |
बरसात की हल्की-हल्की बूंदें खिड़की पर गिर रही थीं। कमरे में हल्का अंधेरा था और मेज पर रखी चाय ठंडी हो चुकी थी। राहुल खिड़की के पास बैठा बाहर देख रहा था। उसकी आंखों में वही खालीपन था जो पिछले दो सालों से उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका था।
आज फिर उसे निशा की याद आ रही थी।
निशा… उसका पहला प्यार, उसकी सबसे अच्छी दोस्त और उसकी पूरी दुनिया।
राहुल और निशा की मुलाकात कॉलेज में हुई थी। शुरुआत में दोनों सिर्फ दोस्त थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। निशा बहुत हंसमुख लड़की थी। उसकी मुस्कान इतनी प्यारी थी कि राहुल का सारा तनाव पलभर में खत्म हो जाता था।
दोनों हर जगह साथ रहते। कॉलेज की कैंटीन, लाइब्रेरी, पार्क, यहां तक कि बस स्टॉप पर भी लोग उन्हें साथ देखकर कहते, “लगता है भगवान ने इन दोनों को एक-दूसरे के लिए ही बनाया है।”
राहुल हमेशा मजाक में कहता,
“अगर तू मेरी जिंदगी से चली गई ना, तो मैं अधूरा हो जाऊंगा।”
और निशा हंसकर जवाब देती,
“पागल! मैं कहीं नहीं जाने वाली।”
लेकिन शायद किस्मत को कुछ और मंजूर था।
कॉलेज खत्म होने के बाद राहुल को दिल्ली में नौकरी मिल गई, जबकि निशा अपने परिवार के साथ लखनऊ चली गई। शुरुआत में दोनों रोज घंटों फोन पर बातें करते थे। वीडियो कॉल, मैसेज, छोटी-छोटी लड़ाइयां… सब कुछ पहले जैसा था।
लेकिन धीरे-धीरे जिम्मेदारियां बढ़ने लगीं।
राहुल ऑफिस के काम में व्यस्त रहने लगा और निशा अपने परिवार की परेशानियों में उलझ गई। बात कम होने लगी। कभी राहुल फोन नहीं उठा पाता, तो कभी निशा नाराज हो जाती।
एक दिन निशा ने गुस्से में कहा,
“अब तुम्हारे पास मेरे लिए टाइम ही नहीं है।”
राहुल भी तनाव में था। उसने बिना सोचे बोल दिया,
“हर समय ड्रामा मत किया करो, निशा।”
बस, वही एक बात दोनों के बीच दीवार बन गई।
उस रात के बाद कई दिनों तक दोनों की बात नहीं हुई।
राहुल को लगा निशा खुद फोन करेगी, और निशा को लगा राहुल उसे मना लेगा। लेकिन दोनों अपने-अपने अहंकार में चुप रहे।
फिर एक दिन राहुल ने हिम्मत करके निशा को फोन किया। लेकिन उसका नंबर बंद आ रहा था।
उसने सोशल मीडिया पर मैसेज किया, पर कोई जवाब नहीं मिला।
करीब एक महीने बाद राहुल को उसके दोस्त अमित से पता चला कि निशा की शादी तय हो गई है।
यह सुनकर राहुल के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उसने उसी वक्त लखनऊ जाने का फैसला किया। पूरी रात ट्रेन में बैठा वह सिर्फ यही सोचता रहा कि निशा उससे नाराज हो सकती है, लेकिन उससे प्यार करना नहीं छोड़ सकती।
सुबह वह निशा के घर पहुंचा। बाहर शादी की सजावट लगी हुई थी। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
तभी सामने निशा दिखी। लाल सूट में वह बेहद खूबसूरत लग रही थी, लेकिन उसकी आंखों में खुशी नहीं थी।
राहुल को देखकर वह कुछ पल चुप रही।
“तुम यहां क्यों आए हो?” उसने धीमी आवाज में पूछा।
राहुल की आंखें भर आईं।
“तुम्हें लेने आया हूं। चलो मेरे साथ।”
निशा हल्का सा मुस्कुराई, लेकिन उस मुस्कान में दर्द था।
“बहुत देर कर दी तुमने, राहुल।”
“मैं तुमसे प्यार करता हूं, निशा। तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।”
निशा की आंखों से आंसू निकल पड़े।
“मैं भी तुमसे प्यार करती हूं… लेकिन प्यार सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं होता। कभी-कभी हालात इंसान को मजबूर कर देते हैं।”
राहुल समझ नहीं पा रहा था कि आखिर ऐसा क्या हुआ।
तब निशा ने बताया कि उसके पिता की तबीयत बहुत खराब थी। परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। जिस लड़के से उसकी शादी तय हुई थी, उसने उनके परिवार की मदद की थी।
“मैं चाहकर भी मना नहीं कर पाई,” निशा ने रोते हुए कहा।
राहुल के पास कोई जवाब नहीं था।
उसने पहली बार महसूस किया कि जिंदगी सिर्फ प्यार से नहीं चलती, कभी-कभी जिम्मेदारियां प्यार से बड़ी हो जाती हैं।
उस दिन राहुल भारी दिल के साथ वापस लौट आया।
निशा की शादी हो गई।
और राहुल की जिंदगी जैसे वहीं रुक गई।
दो साल बीत गए।
राहुल अब भी दिल्ली में नौकरी कर रहा था। बाहर से वह बिल्कुल सामान्य दिखता था, लेकिन अंदर से टूट चुका था। उसने खुद को काम में डुबो दिया, लेकिन हर शाम उसे निशा की याद आ ही जाती।
उसकी भेजी पुरानी तस्वीरें, पुराने मैसेज, साथ बिताए पल… सब कुछ आज भी उसके फोन में सुरक्षित था।
एक दिन ऑफिस से लौटते वक्त राहुल की नजर सड़क किनारे बैठे एक बुजुर्ग दंपति पर पड़ी। दोनों बारिश में भीग रहे थे, लेकिन फिर भी एक-दूसरे का हाथ पकड़े मुस्कुरा रहे थे।
उन्हें देखकर राहुल अचानक सोच में पड़ गया।
सच्चा प्यार शायद सिर्फ पाने का नाम नहीं होता।
कभी-कभी किसी की खुशी के लिए उसे खो देना भी प्यार होता है।
उस रात राहुल ने पहली बार निशा की तस्वीर देखकर मुस्कुराने की कोशिश की।
उसने धीरे से कहा,
“शायद तू मेरी किस्मत में नहीं थी… लेकिन मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा हमेशा रहेगी।”
कुछ दिनों बाद राहुल को अचानक एक अनजान नंबर से कॉल आया।
फोन उठाते ही दूसरी तरफ से आवाज आई,
“कैसे हो राहुल?”
यह निशा थी।
राहुल कुछ पल चुप रह गया।
“ठीक हूं,” उसने धीरे से कहा।
निशा ने बताया कि वह अपने पति और परिवार के साथ खुश है। उसके पिता अब ठीक हैं।
दोनों ने काफी देर तक बातें कीं। पुराने दिनों को याद किया, हंसे भी और थोड़े भावुक भी हुए।
फोन कटने से पहले निशा ने कहा,
“एक बात कहूं?”
“हां…”
“अपनी जिंदगी रोक मत देना। क्योंकि किसी के बिना जिंदगी अधूरी जरूर लगती है… लेकिन खत्म नहीं होती।”
राहुल की आंखें नम हो गईं।
उस दिन के बाद उसने जिंदगी को नए तरीके से देखना शुरू किया।
धीरे-धीरे उसने खुद को संभाला। पुराने दर्द को यादों में बदल दिया।
लेकिन आज भी जब बारिश होती है, और खिड़की पर बूंदें गिरती हैं, तो उसे निशा की याद जरूर आती है।
क्योंकि कुछ लोग जिंदगी से चले जाते हैं, लेकिन दिल से कभी नहीं जाते।
और शायद यही प्यार की सबसे खूबसूरत और सबसे दर्दनाक सच्चाई होती है —
“तेरे बिना अधूरी जिंदगी…”



0 टिप्पणियाँ