रिया और आदित्य की शादी को दो साल हो चुके थे।
दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे, लेकिन पिछले कुछ महीनों से छोटी-छोटी बातों पर झगड़े बढ़ गए थे।
आदित्य ऑफिस में बिज़ी रहता, और रिया को लगता कि अब पहले जैसी अहमियत नहीं रही।
एक शाम रिया गुस्से में बोली,
“तुम्हारे पास सबके लिए टाइम है, बस मेरे लिए नहीं।”
आदित्य भी थका हुआ था।
“रिया, मैं हमारे भविष्य के लिए ही तो मेहनत कर रहा हूं।”
दोनों चुप हो गए।
अगले दिन भी घर में अजीब सी खामोशी थी।
शाम को अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बिजली भी चली गई।
रिया बालकनी में खड़ी बारिश देख रही थी। तभी आदित्य दो कप चाय लेकर आया।
“याद है?” उसने मुस्कुराकर पूछा।
“कॉलेज में तुम बारिश होते ही चाय पीने की जिद करती थीं।”
रिया हल्का सा मुस्कुराई, लेकिन कुछ बोली नहीं।
आदित्य धीरे से बोला,
“शायद मैं काम में इतना उलझ गया कि तुम्हें वक्त देना भूल गया… लेकिन प्यार आज भी उतना ही है।”
रिया की आंखें भर आईं।
“मुझे महंगे गिफ्ट नहीं चाहिए… बस थोड़ा सा वक्त चाहिए।”
आदित्य ने उसका हाथ पकड़ लिया।
बारिश लगातार हो रही थी, लेकिन दोनों के बीच की दूरियां धीरे-धीरे खत्म हो रही थीं।
उस रात दोनों ने घंटों बातें कीं — पुराने दिनों की, सपनों की, और उन छोटी खुशियों की जिन्हें वो भागती जिंदगी में भूल चुके थे।
कभी-कभी रिश्ते टूटते नहीं हैं…
बस उन्हें थोड़ा प्यार, थोड़ा वक्त और एक सच्ची बातचीत चाहिए होती है।



0 टिप्पणियाँ